هنا عكّا

Spread the love

 

هنا عكّا

*****

هنا عكّا..
هنا صخرٌ..
هنا جبلُ..
هنا البركانُ قد دوّى..
هنا التاريخ قد يُروى..
هنا الجزّار يتحدّى..
فلو كانت مدينتا..
تخاف البحر ما سكنت..
على شطئانه يوما.

يثور البحرُ أحيانا..
بعاتِيَةٍ..
من الآمواج يقذفها..
فما خافتْ..
ولا رحلَتْ..
مدى التاريخ قد بقيت..
هنا..
تروي بطولاتٍ..
عن العظماء ..
يذكرها..
رجالٌ عاهدوا وطناً..
هنا باقون يا عكّا.

أحقّا أنتِ يا عكّا..
تنادينا ؟!
من الأجداث تدعونا !!
لنرفعَ هامة العربِ..
وما العربُ..
سوى عينٍ..
تراقب دونما وعْيٍ..
هنا قتلٌ وتدميرٌ..
هنا جُرحٌ..
هنا أسرُ..
وأقصى ما نقدّمه..
حفظنا كم بها قتلى..
وأعداداً من الجرحى..
سويعاتٌ وننساها..
سنجعلها غدا ً ذكرى.

بني صهيون..
هل تدرون؟
وانتم ايها الساهون..
من قوْمي..
ألا تدرون؟!
عظامٌ قبلكم رحلوا..
فإن شئتم سلوا عنها..
نابوليون..
ينبئكم..
وقد ذلّت له الدّنيا..
وذاك الغرْبُ مجتمعاً..
أتاها صائلاً يوماً..
أتاها شاهراً سيفاً..
وما ذلّت لهم عكّا..
وعاد الجمْعُ منهزماً..
على أبوابها اندحرا..
فإن جارت بها الدنيا..
وسُدْتم ساعةًً غدْرا..
فإنّ الأرض يعشقها..
الذي مِنْ تُرْبها خُلِقا..
فلن تبقوا بها أبدا..
سيأتيكم من الأنباء..
ما تخشون يا حمقى..
نهايتكم هنا تبدو..
وتبقى دائماً..

عكّا.

 :بقلم 

الأديب والشاعر
الدكتور

وصفي تيلخ

هنا عكّا

 تحرير

علاء محروس مرسي

تعليقات الفيس بوك

التعليقات

عن الكاتب علاء محروس

x

‎قد يُعجبك أيضاً

عوالق الأسرى

Spread the love  ليس من حب الهوى هدير حفاوة وماثر منى فان ...